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आजकल असमय बालों के सफ़ेद होने की समस्या आम है. इससे बचना अब मुश्किल ही लग रहा है. क्योंकि ये बीमारी रुकने का नाम नहीं ले रही है. यहाँ तक कि बच्चों को भी इसने नहीं छोड़ा है. सफ़ेद बाल (White Hair) अब नहीं करेंगे परेशान, अपनाइए ये 10 घरेलु नुस्खे.

1. एलोवेरा है लाजवाब
एलोवेरा जेल में नींबू का रस मिलाकर बने पेस्ट को बालों में लगाने से बालों का झड़ना और सफ़ेद होना दोनों रुक जाता है. ये आसानी से मिल भी जाता है और इसमें झंझट भी नहीं है.

2. भृंगराज और अश्वगंधा है अचूक
आयुर्वेद में भृंगराज और अश्वगंधा के कईगुणों की चर्चा है. बालों के लिए सर्वोत्तम माने जाने वाले भृंगराज और अश्वगंधा का पेस्ट बनाकर उसमें नारियल तेल मिलाकर इसे बालों की जड़ों में लगाएं. इसके बाद बालों को गुनगुने पानी से धो लें. इससे बाल काले तो होते ही हैं. उनकी कंडीशनिंग भी हो जाती है.

3. बहुपयोगी आंवला
आंवला एक ऐसा फ़ल है जिसे आप सर्वगुणसंपन्न कह सकते हैं. इसके नियमित उपयोग से बालों के सफ़ेद होने की समस्या से छुटकारा मिलता है. इसे खाना तो शुरू कर ही दें साथ ही मेहंदी में मिलाकर इसका घोल बालों में लगाएं. चाहें तो बारीक कटे आंवले में नारियल तेल मिलाकर सर पर लगाएं.

4. दही भी कम नहीं
सुनकर भले ही अजीब लगे लेकिन दही और हिना को बराबर मात्रा में मिलाकर बनाया गया पेस्ट हफ्ते में एक बार बालों में लगाने से सफेद बाल काले होने लगते हैं.

5. प्‍याज में छुपे हैं राज
रोजाना नहाने से कुछ देर पहले बालों में प्याज का पेस्ट लगाएं. इससे भी आपके सफेद बाल (White Hair) काले होने शुरू हो जाते हैं. साथ में बालों में चमक भी आती है और बालों का गिरना भी रुक जाता है.

6. दूध की सफेदी से सफ़ेद बाल (White Hair), काला
गाय का दूध बालों में लगाने से आपका सफ़ेद बाल धीरे-धीरे काला होने लगता है. इससे बाल प्राकृतिक रूप से काला होता है. ऐसा आपको मात्र हफ्ते में एक दिन करना होता है.

7. कढ़ी पत्ता भी काम का चीज
नहाने से कुछ देर पहले नहाने के पानी में कढ़ी पत्ता छोड़ दें. फिर लगभग एक घंटे बाद उस पानी से सिर धो लें. आप चाहें तो कढ़ी पत्ते को भी बारीक काटकर उसमें गर्म नारियल तेल मिलाकर सिर पर लगाएं लाभ मिलेगा.

8. देसी घी से देसी इलाज
यदि आपका गाँवों से कुछ भी रिश्ता है तो आपने भी इसके बारे में सूना होगा. घी का मालिश करने से त्वचा को पोषण मिलता है और इसके साथ ही सफ़ेद बालों की समस्या से छुटकारा भी मिलता है.

9. काली मिर्च करे बाल काला
काली मिर्च मसाले के रूप में तो आपने प्रयोग किया होगा लेकिन ये आपके बाल भी काला कर सकती है. इसके लिए आपको इसके दानों को पानी में उबालकर बाल धोने के बाद सिर में डालते रहने से कुछ दिन बाद इसका असर शुरू होता है.

10. कॉफी और काली चाय
ये घरेलु नुस्खा भी काम का है. आपको करना बस इतना है कि बालों को ब्लैक टी या कॉफ़ी के अर्क से बालों को प्रत्येक दिन धोना है. इससे आपके बाल काले होने लगते हैं.

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मुंबई की लोकल ट्रेन्स को वहां की लाइफ-लाइन कहा जाता है. ये सुबह-सुबह या कहिए पूरा दिन लोगों को अपने गंतव्य पर पहुँचाने का काम बखुब करती है. आपको पता है आज ही के दिन चली थी मुंबई की लाइफ-लाइन (Life-Line) लोकल ट्रेन.

मुंबई की Life-Line के 150 साल
12 अप्रैल, 1867 को विरार से शुरू होने वाली लाइफ-लाइन के नाम से जाने जाने वाले मुंबई लोकल ने आज 150 साल पुरे कर लिए हैं. आज से 150 साल पहले यानी सन 1867 में आज ही के दिन बॉम्बे बड़ौदा व सेन्ट्रल इंडियन चली थी. पहली बार यह सर्विस 4 कार वाली थी. तब इसकी फ्रीक्वेंसी भी सीमित हुआ करती थी. सुबह 6:45 बजे से शाम 5:30 बजे, विरार से बॉम्बे बैक तक चलती थी. तब यात्रियों की 3 श्रेणियां थीं और आम तौर पर लोग दूसरी श्रेणी में सफर करते थे. 7 पैसे प्रति मिल किराया हुआ करता था लेकिन दूसरी श्रेणी का किराया 3 पैसे प्रति मिल था. अब तो इसका विस्तार पुरे मुंबई में व्यापक स्तर पर हो गया है. आज की तारीख में तो लोग इसका इस्तेमाल भी भारी संख्या में करने लगे हैं.

उस समय इसमें स्मोकिंग जोन भी हुआ करता था और महिलाओं के लिए अलग से सेकेंड क्लास कोच होता था. तब दो स्टेशनों के बीच वक्त भी कम ही लगता था. क्योंकि अब उन स्टेशनों के बीच में कई स्टेशन बन गए हैं. मुंबई की लोकल ट्रेन्स का संचालन रेलवे के वेस्टर्न जोन द्वारा किया जाता है. आज प्रत्येक दिन लगभग 1323 ट्रेनों की रोज आवाजाही होती है यानि कि हर तीसरे मिनट में एक नइ ट्रेन चल पड़ती है. रोज लगभग 35 लाख यात्री इन ट्रेनों में यात्रा करते हैं. मुंबई लोकल नाम का सम्बोधन पहली बार कल्याण से उत्तर माहिम के लिए 1 फरवरी 1865 में किया गया था. सन 1925 में यातायात सम्बन्धी समस्याओं के लिए स्टीम इंजन की जगह इलेक्ट्रिक इंजन की शुरुआत हुई थी.

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प्रेमी युगल को हमेशा से ऐसे सुरक्षित तरीकों की तलाश रही है जिससे कि अनचाहे गर्भ से बचा जा सके। ऐसे में जब से गर्भनिरोधक (Contraceptive) गोलियां आईं तब से एक सामाजिक क्रांति सी आ गई।

Contraceptive के रूप में मगरमच्छ का इस्तेमाल

pregnecy
एक रिपोर्ट के अनुसार मिस्र की प्रेमिकाएं अनचाहे गर्भ को रोकने के लिए मगरमच्छ का मल इस्तेमाल करतीं थीं। इस बात का उल्लेख 1850 ईसा पूर्व के दस्तावेजों में मिलता है। मगरमच्छ का मल आधुनिक शुक्राणु की तरह थोड़ा सा क्षारीय होता है। इस तरह इस बात के सबूत तो पुख्ता तौर पर उपलब्ध हैं की पहले भी इस तरह के तरीके उपलब्ध थे। प्राचीन काल से ही इस दिशा में प्रयास जारी थे।

आधा निचोड़ा नींबू
इसका इस्तेमाल तो कई संस्कृतियों में शुक्राणुनाशक के रूप में किया जाता था। भेड़ के मूत्राशय के बने कॉन्डम में निचोड़े हुए आधे नींबू का इस्तेमाल अस्थायी रूप से सर्वाइकल कैप की तरह किया जाता था। नींबू में पाया जाना वाला साइट्रिक एसिड शुक्राणुनाशक का काम करता है। लेकिन यह उनके लिए नहीं था जो संयम से काम नहीं लेते। यानि संयम से बड़ी कोई चीज नहीं होती।

आज की क्या है स्थिति?
इस मामले में अमरीका दुनिया का पहला वो देश था जिसने 1960 में गर्भनिरोधक गोली के इस्तेमाल की अनुमति दी। उसके बाद तो मेडिकल विभाग ने लगातार शोध कर के कई तरीके खोजे। फिर इस क्षेत्र में कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा गया। अब तो स्थिति इतनी बदतर हो गई है ओर इसका दुरुपयोग बढ़ने से गर्भनिरोधक कानून बनाए गए है। अलग-अलग देशों मे इसे लेकर अलग अलग तरह के कानून बनाए गए हैं। लेकिन अब कानून के दुरुपयोग की भी खबरें आने लगीं हैं। फिर भी मेडिकल क्षेत्र ने इस मामले में काफी प्रगति की है। आगे भी प्रगति करता ही जा रहा है लेकिन इसे लेकर सामाजिक जागरूकता की भी आवश्यकता है।

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